मऊ :देश में गहराते कोरोना संकट से चिंता बढ़ती जा रही है। मरीजों की रोजाना बढ़ती संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है। अस्पालों में मरीज बेड और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं।
सरकारी कागजों पर दिख रहे बड़े-बड़े दावों पर तेजी से हो रहे कामों की हकीकत बस इतनी सी है कि अब संक्रमित मरीजों को इलाज मिलना तो दूर की बात अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन ना मिलने से मरीज दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच आम लोग अपनी जिंदगी से एक जंग लड़ते हुए नजर आ रहे हैं
किसी को बेड मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तो कुछ को ऑक्सीजन की कमी के चलते अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
कोरोना की दूसरी लहर देश और उत्तर प्रदेश के साथ साथ मऊ के लोगों पर भी भारी पड़ रही है। मऊ के अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की कमी से हालात संभलने की जगह लगातार बिगड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। वहीं, संक्रमितों की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है।
ऑक्सीजन की कमी और किल्लत से पूरा शहर जूझ रहा है।
कोविड मरीजो के लिए बनाए गए एल-2 परदहां से मरीजों को वापस कर दिया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कल 23-24 की रात 12 बजे के आसपास घोसी के मदापुर निवासी ज़ैनुल आब्दीन को सिफारिश करने के बाद परदहां के L2 कोविड सेंटर में एडमिट कर आक्सीजन लगाया गया था, लेकिन आधे घंटे बाद ही उनसे आक्सीजन हटा कर किसी अन्य अस्पताल ले जाने के लिए बोल दिया गया। उसके बाद मरीज जीवन और मौत से संघर्ष करते हुए दर दर की ठोकरें खाता रहा, शारदा नारायण हॉस्पिटल ले जाने पर बेड फुल होने का हवाला दिया गया, फातिमा हास्पिटल जाने पर अस्पताल प्रशासन ने 80+ बाडी का आक्सीजन रहने पर ही इलाज करने की बात कह कर इलाज से मना कर दिया। आईकान हास्पिटल ने भी बेड फुल होने की बात कहकर अपना पलड़ा झाड़ लिया। ऐसे में मरीज भगवान भरोसे बिना आक्सीजन के ही निराश घर की तरफ लौट गया। उक्त मरीज के परिजनों ने बताया कि उनके सामने ही एक और कोविड संक्रमित अपनी रिपोर्ट के साथ पहुंचा लेकिन उसे भी एडमिट ना करके वापस कर दिया गया।
वहीं सोशल मीडिया पर सामाजिक एक्टिविस्ट अर्चना उपाध्याय ने भी एक पोस्ट कर किसी मरीज को जिला अस्पताल में इलाज ना मिलने की बात उजागर की है।
सरकार और प्रशासन लाख सब ठीक होने का दावा करे, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।
अपनी जिंदगी से जंग लड़ते नजर आ रहे मरीज, नहीं मिल रहा समय से इलाज
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