एक बहुमुखी व्यक्तित्व के मालिक थे डॉ शकील समदानी उनका निधन एक बड़ी क्षति: डॉ ज़्याउल्लाह

मऊ – अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लॉ फैकल्टी के डीन प्रो. डॉ शकील अहमद समदानी का पिछले दिनों एएमयू के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान निधन हो गया था।
डॉ शकील अहमद समदानी के निधन पर आज एएमयू के अब्दुल्लाह वुमेंस कालेज में इतिहास विभाग के पूर्व प्रवक्ता डॉ ज़्याउल्लाह के मऊ स्थित आवास पर एक शोक सभा आयोजित की गई।
जिसमें डॉ शकील अहमद समदानी के व्यक्तित्व, शैक्षणिक क्षमता, मैत्रीपूर्ण व्यवहार तथा मधुर स्वभाव पर प्रकाश डाला गया।
एएमयू के अब्दुल्लाह वुमेंस कालेज के पूर्व प्रवक्ता व वर्तमान में डीसीएसके पीजी कालेज मऊ में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मुहम्मद ज़्याउल्लाह ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए इसे एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि डा. शकील समदानी एक बहुमुखी व्यक्तित्व के मालिक थे।
ये यूपी के जौनपुर निवासी थे, प्रोफेसर शकील समदानी ने यूपी बोर्ड से 10 व 12 उत्तीर्ण करने के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी से BA किया था। उसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी, एलएलएम व पीएचडी पूरी की थी और वहीं पर इस समय लाॅ फैकल्टी के डीन थे।
गोपीनाथ पीजी कालेज के प्रवक्ता सईदुज़्ज़फर ने डॉ शकील समदानी से अपने सम्बन्धों का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमारा और उनका रिश्ता एक शिक्षक और छात्र का था, लेकिन जब भी वह मऊ आते थे तो फोन और मैसेज के माध्यम से अपने मऊ में होने की जानकारी देने के साथ ही मुलाकात की ख्वाहिश रखते थे और अक्सर मुलाकात भी होती रहती थी। डॉ शकील समदानी के मौत की खबर सुनने के बाद तो एक बार विश्वास ही नहीं हो रहा था कि डॉ साहब हम लोगों के बीच नहीं हैं, उनके जाने का हमें बहुत अफसोस है क्योंकि हमने एक बहुत ही मिलनसार व्यक्ति खो दिया।
सईदुर्रहमान (सिविल इंजीनियर) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ शकील अहमद समदानी की उच्च शैक्षणिक क्षमता और मैत्रीपूर्ण व्यक्तित्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि डॉ साहब का निधन एक बहुत बड़ी क्षति है।
डॉ रैहान ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एएमयू ने एक लोकप्रिय शिक्षक खो दिया है। वह छात्रों के बहुत करीब थे।
छात्रों ने इनके मार्गदर्शन में बहुत कुछ सीखा और उसका पूरा उपयोग किया। वे हमेशा याद रहेंगे।
इनका निधन शैक्षणिक व सामाजिक क्षति है, ये एक ऐसे विचारक थे जो समाज में सुधार के लिए हमेशा चिंतित रहते थे।
सरफराज़ सिल्को ने कहा कि वह बहुत मिलनसार थे और सरल स्वभाव के थे इनका मऊ से बहुत अच्छा लगाव था। यहां के अधिकतर लोगों को ये नाम से जानते थे और नाम से पुकारते थे। मऊ आने पर इनका कहीं ना कहीं प्रोग्राम अवश्य होता था,और मऊ के जागरूकता प्रोग्राम में हमेशा बहुत ही अहम मुद्दों पर ही अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं, लेकिन अफसोस की अब शकील समदानी को नहीं सुन पाएंगे, इनका मऊ में अन्तिम प्रोग्राम 11 फरवरी को नगरपालिका में हुआ था जिसमें इन्होंने काफी देर तक शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अपने विचार व्यक्त किए थे।
मंज़र कमाल एकाउंटेंसी ज़ोन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस देश ने एअ अच्छा वक्ता खो दिया जो सभी को साथ लेकर चलने की बात करते थे और शिक्षा के क्षेत्र में सभी को प्रोत्साहन करते थे।

राशिद असरार ने अपने दुख का इज़हार करते हुए कहा कि डॉ साहब का इस दुनिया से जाना हम लोगों के लिए बहुत दुख दे गया, क्योंकि इनका प्यार और मार्गदर्शन हमेशा हम लोगों के साथ रहा।
शोक सभा के अंत में डॉ शकील समदानी के लिए दुआए मगफिरत की गयी, साथ ही साथ मऊ के मौलाना अबसारूलहक कासमी के लिए भी दुआए सेहत की गयी, जो इस समय लखनऊ में इलाज के लिए एडमिट हैं।


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