एमएए फाउंडेशन के तत्वावधान में मऊ के होनहारों के लिए सजी एक शाम, किए गए सम्मानित

मऊ (रिपोर्ट :सईदुज़्ज़फर) नीट यूजी क्वालीफाई छात्रों के सम्मान में एमएए फाउंडेशन की तरफ से एक सम्मान समारोह “तालिमी एज़ाज़ की एक शाम, नई नस्ल के नाम” प्रोग्राम का आयोजन कल देर शाम डोमनपुरा स्थित मदरसा आलिया निस्वां के प्रांगण में किया गया। जिसमें सफल छात्रों को मेडल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित छात्रों व उनके अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए मौलाना मज़हर आज़मी ने कहा कि बगैर मेंहनत और कोशिश के कुछ भी नहीं मिलता और सफलता प्राप्त करने वाले बच्चों के पीछे अभिभावकों का भी बहुत बड़ा रोल होता है इसलिये कुछ बन जाने के बाद बच्चों को चाहिए कि वह अपने अभिभावकों को ना भूलें। उनके द्वारा दी गई कुर्बानियों को याद रखें।
मौलाना इफ्तिखार अहमद मिफ्ताही ने कहा कि इस्लाम धर्म सबसे पहली शिक्षा “इकरा” की ही देता है अर्थात पढ़ो। इस्लाम धर्म हर तरह की शिक्षा ग्रहण करने पर ज़ोर देता है। आगे उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी शिक्षा के क्षेत्र में में मर्दों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की ज़रूरत है। और इस तरह का सम्मान समारोह आने वाली नस्लों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।
शिक्षाविद् डॉ शकील अहमद ने कहा कि कोरोना काल के बाद इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की कामयाबी सराहनीय है इसके साथ ही असफल बच्चों को भी निराश होने की ज़रूरत नहीं है इन्होने उम्मीद जताई कि आगे इससे भी बड़ी संख्या में बच्चे सफल होंगे। आगे उन्होंने कहा कि बच्चों ने समय के साथ चलना सिख लिया है अब इनके सामने ये भी चैलेंज है कि अपनी धार्मिक क्रिया कलापों रोज़ा नमाज़ आदि को भी ना छोडें।
डीसीएसके पीजी कालेज मऊ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मो.ज़्याउल्लाह ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मऊ में तालीमी इन्कलाब आया है, शिक्षा का कारवाँ निकल पड़ा है अब पलट कर देखने की जरूरत नहीं है और अपने बाज़ुओं पर भरोसा रखना है और आगे बढ़ना है। इन्होंने कुरआन का हवाला देते हुए कहा कि इंसान के लिए वही है जो कोशिश करता है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि मंजिल पर पहुंचने के बाद आप कभी भी किसी की मजबूरी का फायदा ना उठाएं बल्कि सेवाभाव से लोगों का सहयोग करें क्योंकि आपकी सफलता में किसी ना किसी रूप में हर किसी का सहयोग होता है, लोगों का सहयोग ना भूलें।
द नेशन फाउंडेशन क्लासेस के डायरेक्टर इं जमील अंसारी ने कहा कि मंजिल पर पहुंचने के बाद हर कोई सराहना तो कर रहा है लेकिन इसको प्राप्त करने के लिए किसी ने इनके पैरों के छालों को नहीं देखा, और अगर छात्र मेंहनत के बाद भी सफल नहीं होता है तो समाज उसे जीने भी नहीं देता है तरह तरह के सवाल करता है कि इतने दिन क्या किया, उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे बच्चों को कभी गिरी हुयी नज़रों से ना देखें। क्योंकि सफलता के लिए सबसे पहले किसी असफल व्यक्ति की कहानियां पढ़ें।
उन्होंने सफल छात्रों को विशेष रूप से सम्बोधित करते हुए कहा कि आप जहां भी जाना अपने आप को अच्छा साबित करना, समाज की ज़िम्मेदारी अब आपके कंधों पर होगी, अपनी सर्विस के दौरान मरीज़ का विशेष ध्यान देना।
आगे उन्होंने सिविल सर्विस में भी जाने पर बल दिया। और कहा कि लक्ष्य को यहीं तक सीमित ना करें। टार्गेट हमेशा बड़ा रखें।
डॉ नुरुलहसन ने कोचिंग और काउंसिलिंग पर विशेष बल दिया और कहा कि मऊ में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में एमएए फाउंडेशन के चेयरमैन जमाल अर्पण ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बच्चों के हौसलों की सराहना होनी चाहिए साथ ही उन्होंने असफल छात्रों से कहा कि आप को निराश होने की जरूरत नहीं है और कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इरादा मजबूत होतो सफलता अवश्य कदम चूमती है।
इस अवसर पर सफलता प्राप्त करने वाले छात्र अनस मुस्तफा, अलकमा ओबैद, रशिका ताज आदि ने भी अपने अपने अनुभव साझा किए।
शायर मुईनुद्दीन आमिर ने पढ़ो- मेंहनत करो, आगे बढ़ो, कुछ बन के दिखलाओ नज़्म पेश कर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन सलमान अबरार व अल्तमश अंसारी ने संयुक्त रूप से किया।


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