मऊ – आज शारदा नारायन हास्पिटल में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें शारदा नारायन हास्पिटल की इन्फर्टीलिटी स्पेश्यिलिस्ट डा0 एकिका सिंह ने बताया कि उन्होने एक मरीज का आपरेशन किया जिसके गर्भाशय में 40 रसौली(यूट्राइन फाइब्रॉएड) थे। जिसे शारदा नारायन हास्पिटल के सर्जीकल टीम ने 2 घंटे चले एक सफल आपरेशन के माध्यम से निकाला और मरीज अब स्वस्थ है तथा उम्मीद है कि वह पुनः गर्भ धारण करेगी। आगे डा0 एकिका सिंह ने कहा कि बच्चेदानी में रसौली एक गैर-कैंसरकारी ट्यूमर होता है। इसका असर फर्टिलिटी और गर्भ धारण करने की संभावना पर पड़ सकता है।लगभग 20 से 80 फीसदी महिलाओं को 50 की उम्र तक बच्चेदानी में रसौली की परेशानी होती ही है। वहीं, 25 से 44 साल की 30 प्रतिशत महिलाओं में रसौली के लक्षण देखे जाते हैं। इसका मतलब है कि प्रजनन की उम्र में महिलाओं में रसौली बनना आम बात है। इसके लक्षण के बारे में बोलते हुए डा0 एकिका सिंह ने कहा कि हो सकता है कि आपको गर्भाशय में गांठ बनने के कोई लक्षण दिखाई न दें। वहीं बच्चेदानी में रसौली के संकेतों में माहवारी के दौरान अधिक खून आना या पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होना, माहवारी आने से पहले ही स्पॉटिंग होना शामिल है। आपको फाइब्रॉयड्स हैं, यह अल्ट्रासाउंड के जरिए ही पता चलता है। इस प्रकार के सफल आपरेशन के लिए शारदा नारायन हास्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डा0 संजय सिंह ने डा0 एकिका सिंह,डा0 सुजीत सिंह और उनकी पूरी सर्जीकल टीम की भूरी भूरी प्रशंसा किये।

डा0 एकिका सिंह ने किया गर्भाशय के 40 फाइब्रॉएड/ ट्यूमर का सफल आपरेशन
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