मऊ -(सईदुज़्ज़फर) शायर, शिक्षाविद व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो० मौलाबख्श के निधन से पूरे उर्दू जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
उर्दू पढ़ाओ तहरीक की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उर्दू पढ़ाओ तहरीक के कंवेनर ओज़ैर गृहस्थ ने कहा कि प्रो० मौलाबख्श बहुत प्रतिभाशाली, योग्य और बुद्धिमान व्यक्ति थे। अपने अच्छे स्वभाव के कारण वह बहुत कम समय में लोकप्रिय हो गए थे।
डाक्टर शकील आज़मी ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रोफेसर मौला बख्श एक समर्पित शिक्षक थे, उन्हें अपने छात्रों के साथ ज्ञान साझा करना बहुत पसंद था। उनका निधन उर्दू जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।
डॉ इम्तियाज़ नदीम ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए बताया कि प्रोफेसर मौला बख्श एक शैलीवादी थे जिन्हें गद्य, आलोचना और साहित्यिक सिद्धांत के साथ द्विभाषी आलोचना के लिए जाना जाता था। इनका इस दुनिया से जाना उर्दू अदब का एक बहुत बड़ा नुकसान है।
शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में प्रमुख रूप से डाक्टर शाहनवाज़, डॉक्टर ज़्याउल्लाह, अमीर हमज़ा आज़मी, डॉक्टर नफीस अब्दुल हकीम, डॉक्टर रफीक अशफाक, ज़की महफूज़, अश्फाकुर्रहमान शरर, दानिश असरी, सईदुज़्ज़फर, राशिद ज़्या, डॉ शमीम, साजिद गुफरान, सरफराज़ सिल्को आदि शामिल रहे।
प्रो० मौलाबख्श का निधन उर्दू जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति: डॉ शकील
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