युक्रेन में फंसा छात्र शिवम पहुंचा मऊ अपने घर, पहुंचते ही परिजन उत्साहित

रतनपुरा (मऊ)। रतनपुरा निवासी शिवम यादव पुत्र जयप्रकाश यादव यूक्रेन से चलकर शुक्रवार की प्रात 5:00 बजे अपने घर पहुंच गया। घर पहुंचते ही उसके परिजन ,रिश्तेदार, शुभचिंतक और मोहल्ले वासियों ने उसके दरवाजे पर पहुंचकर के उसका हालचाल जाना।
उल्लेखनीय है कि शिवम यादव एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है ,और वह यूक्रेन के विनीत्सिया नेशनल यूनिवर्सिटी एवं मेडिकल कॉलेज मैं अध्ययन कर रहा है। विनीत्सिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी यूक्रेन की राजधानी कीव से 300 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। भारत सरकार की पहल पर इन्हें मेडिकल कॉलेज के बंकर से निकाल कर के रोमानिया बॉर्डर पर ले जाया गया। जहां पर भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विमान से यह लोग मुंबई पहुंचे। शिवम यादव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल स्थित बंकर से निकालकर बस के जरिए रोमानिया बॉर्डर पर ले जाया गया । बीच-बीच में जो शेल्टर होम बने हुए थे ,वहां पर उन्हें निशुल्क भोजन, कंबल, साबुन, बिस्कुट इत्यादि उपलब्ध कराए गए। भारत वासियों के प्रति वहां पर अगाध प्रेम देखा गया। युद्ध की विभीषिका झेल रहे यूक्रेन वासियों ने जगह-जगह शेल्टर होम स्थापित कर रखे थे ।जहां पर अध्ययन करने गए छात्रों के साथ बहुत ही दोस्ताना व्यवहार अपनाया गया। यूक्रेन में आम बोलचाल की भाषा यूक्रेनी और रशियन है ।अंग्रेजी बहुत ही कम प्रचलन में हैं। जिसकी वजह से शिवम यादव अपने साथियों के साथ खाने पीने के लिए बाहर नहीं निकलते थे ।क्योंकि वहां के रेस्टोरेंट और होटलों में नॉनवेज चलता है, और वे लोग नॉनवेज पसंद नहीं करते थे। जिसकी वजह से यह लोग बाहर नहीं निकलते थे। युद्ध के समय इनकी मेडिकल यूनिवर्सिटी को कोई क्षति तो नहीं पहुंची, लेकिन छात्रावास के नीचे बनाए गए बंकर में यह लोग सुरक्षित रहते थे। युद्ध की शुरुआत होते ही मेडिकल अभ्यर्थी अत्यंत ही भयभीत हो गए थे ,और उन्हें सुरक्षित अपने देश पहुंचने की ललक पैदा हो गई थी। पत्रकारों से बातचीत करने के दौरान शिवम यादव के पिता जयप्रकाश यादव उनकी माता गीता देवी तथा मामा लोग उपस्थित थे। शिवम यादव ने बताया कि यूक्रेन से ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है ,और मेडिकल यूनिवर्सिटी से यह ऑफर भी आया है कि वे चाहे तो अपना यूनिवर्सिटी कॉलेज किसी अन्य देश में स्थानांतरित करा सकते हैं। यूक्रेन से आए आफर से शिवम यादव विचार कर रहे हैं कि भारत सरकार अपने यहां मेडिकल कॉलेजों में सीट बढ़ाएं और अनुदानित स्तर पर उन्हें अपने यहां यूक्रेन से स्थानांतरित अभ्यर्थियों को दाखिला दिलवाए, ताकि किसी भी मेडिकल अभ्यर्थी के सत्र नुकसान ना हो। शिवम यादव के माता-पिता चाहते हैं कि भारत सरकार चुनाव बाद इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करें। ताकि किसी भी मेडिकल अभ्यर्थी के शैक्षिक भविष्य अंधकारमय ना हो।


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