मऊ – पच्चीस साल तक मऊ विधान सभा सीट पर राज करने वाले विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के चुनाव मैदान में उतरने की बात लोगों के गले से उतर नहीं रही, लोगों का कहना है कि यहां विरासत नहीं चलेगी, अगर मुख्तार को नहीं लड़ना था तो यहां के किसी स्थानीय नेता को भी मौका दिया जा सकता था, जेल में बंद मुख्तार अंसारी के कारण बुनकरों की आवाज़ विधानसभा तक नहीं पहुंच पाती, जब भी मऊ में कोई मामला हुआ तो यहां के स्थानीय नेता ही लोगों के दुख दर्द में शामिल हो कर अपनेपन का एहसास दिलाया, लेकिन चुनाव का बिगुल बजते ही मुख्तार का परिवार व इनके वो समर्थक भी दिखाई देने लगे जो कभी प्रशासन का डंडा चलने से मुख्तार का नाम लेने से भी डरते थे।
अब्बास अंसारी के मैदान में आने से स्थानीय युवा इसका जमकर विरोध कर रहे हैं और और सोशल मीडिया पर #upelection2022 , #NoVoteToAbbas का हैश टैग भी चला रहे हैं।
मऊ का युवा, गठबंधन से स्थानीय प्रत्याशी की मांग को लेकर सवाल भी कर रहा है जो आने वाले दिनों में गठबंधन के पक्ष में वोट को लेकर अच्छे संकेत नहीं है, इसका खामियाजा गठबंधन को उठाना भी पड़ सकता है, क्योंकि जबतक मुख्तार अंसारी मैदान में थे तो लोग दबी दबी जुबान से इसका विरोध कर रहे थे लेकिन बेटे अब्बास के मैदान में आ जाने से यहां के युवा सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि यहां विरासत और गुलामी की राजनीति नहीं चलेगी, इसके पहले भी शहर में मुख्तार अंसारी का विरोध इस बात को लेकर होता रहा है कि यहां विकास रूका हुआ है, विरोध का परिणाम ही था कि पिछले चुनाव में शहर से सपा उम्मीदवार अल्ताफ अंसारी मुख्तार अंसारी से आगे थे ये अलग बात थी कि वह आउटसाईड से जीत गए थे, सबसे बड़ी बात यह है कि यहां के कुछ स्थानीय नेता जो बाहरी का विरोध कर रहे थे आज बिना किसी विरोध के उनके साथ चल रहे हैं, जिसका परिणाम आगे स्थानीय नेताओं समेत उन पार्टियों को भी भुगतना पड़ सकता है जो स्थानीय प्रत्याशी के नाम पर मौन साधे हुए हैं।

सोशल मीडिया पर युवाओं ने चलाया “नो वोट टू अब्बास हैश टैग” , मुख्तार के बाद अब्बास के चुनाव लड़ने को लेकर युवा पीढ़ी में आक्रोश
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