हक की लड़ाई सिर्फ सोशल मीडिया ही लड़ रहा है, सोशल मीडिया आज के दौर में एक ताकत है: प्रो.आफताब आफाकी

आज़मगढ़ – शिब्ली नेशनल महाविद्यालय के कांफ्रेंस हाल में एनसीपीयूएल नई दिल्ली उर्दू विभाग शिब्ली नेशनल कालेज के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ” उर्दू ज़बानों-व-अदब और सोशल मीडिया” पर सेमिनार का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज मोहम्मद जैद की तिलावते कलाम पाक से की गई।
मुख्य अतिथि सौबान सईद ने सोशल मीडिया पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि आज उर्दू वालों के लिए युनिक कोड आ जाने से सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर उर्दू में अपनी बात कहना आसान हो गया है। विशिष्ट अतिथि प्रो. फखरे आलम ने कहा कि सोशल मीडिया ने तरक्की के जमाने में वह अपना एहसास जरूर दिला देती है, वह पुस्तकों का विकल्प नहीं होती है। अदब का ताल्लुक जज्बात से है, जबान का ताल्लुक जज्बात से नहीं, जिस शिद्दत के साथ बुराई फैल रही है, उसे रोकने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया अच्छी बातों को फैलाने के लिए है। प्रो.आफतब अहमद अफाकी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि हक की लडाई सिर्फ सोशल मीडिया ही लड़ रहा है। सोशल मीडिया आज के दौर में एक ताकत है, हमें नकारात्मक से सकारात्मक सोचने की आवश्यकता है, एक अच्छा शिक्षक वही होता है, जो हमेशा विद्यार्थी बना रहता है, ज्ञान का आदान-प्रदान सोशल मीडिया का एक सशक्त माध्यम है।
वही गाज़ीपुर से आये डेलीगेट, सईदुज़्ज़फर, बीएचयू से डा.एहसान तथा डा. मुशर्रफ अली, आफताब आलम नज्मी ने अपने शोध पत्र को प्रस्तुत किया।
इस मौके पर ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती अरबी फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ , प्रबन्ध समिति के सदस्य अख्तर रशीद खां, शिब्ली एकडमी के रफीक उमैर सिद्दीकी नदवी, प्राचार्य डा.अफसर अली, डा.बीके सिंह, डा. शफीउज्ज़मा, डा.मोकर्रम अली, अबू राफे , निदा शफी, ज़हरा इकबाल, फहीम अहमद, साकिब फैज़ान आदि सभी शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। सं
चालन उर्दू विभागाध्यक्ष तथा सेमीनार के संयोजक, डां मोहम्मद ताहिर ने किया।
शिब्ली नेशनल कालेज की सोसाइटी के अध्यक्ष डा. शौकत अली ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


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