स्वनिधि दीपोत्सव मेले में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का हुआ आयोजन

पालिका महोत्सव कराने के वादे के साथ पालिकाध्यक्ष ने किया दीपोत्सव कार्यक्रम का समापन

मऊनाथ भंजन, मऊ। दीपावली के अवसर पर नगर क्षेत्र के सोनीधापा इण्टर कालेज के मैदान में नगर पालिका परिषद द्वारा लगाये गये स्वनिधि दीपोत्सव मेले के तीसरे दिन शनिवार की रात को नगर पालिका परिषद द्वारा पालिकाध्यक्ष मुहम्मद तैयब पालकी की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। उक्त कवि सम्मेलन/मुशायरे में गैबी जौनपुरी, तारकेश्वर मिश्र राही, चाँदनी शबनम, अचानक मऊवी, पंकज प्रखर, डंडा बनारसी, सैदा बैजापुरी, नागेश शाण्डिल्य, सलमान घोसवी, शैलेन्द्र मधुर, शहाब नोमानी, आदि नामचीन हस्तियों/कवियों ने भाग लिया। जिसमें चाँदनी सबनम व सलमान घोासवी ने शमा को रंगीन किया तो वहीं हास्य कवि डंडा बनारसी, अचानक मऊवी, नागेश शाण्डिल्य व सैदा बैजापुरी ने अपनी रचानाओं एवं व्यंगो से उपस्थित लोगों को लोट-पोट होने को मजबूर कर दिया। रात्रि 10 बजे तक चले इस कवि सम्मेलन में काव्यकारों ने अपनी रचनाओं से खूब गुदगुदाया। इस दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे श्रोताओं ने भी जमकर तालियां बजाई। कवियित्री चाँदनी शबनम ने अपनी रचना ‘‘सबके रुख पर यहाँ ताज़गी आगई, बज़्म में आप आये खुशी आगई, हक मुहब्बत का मैंने अदा कर दिया, तुमने आवाज़ दी चाँदनी आगई‘‘ से अपनी शायरी का आगाज़ किया। चाँदनी शबनम की शायरी तुझे कितना चाहती हूँ, तुझे क्या पता नहीं है…. तुमने ज़ख्म जो दिया था अभी वो भरा नहीं है…….. मुझे छोड़कर न जाओ मेरी यही है गुज़ारिश, मेरे पास बैठो अभी दिल भरा नहीं है। रोज़ तेरा सताना चलेगा नहीं, ख्वाब में आना जाना चलेगा नहीं, गुफ्तगु तेरी नज़रो से करती हूँ मैं, तेरा नज़रे झुकाना चलेगा नहीं….. सुनकर लोगों की तालियां थमने का नाम नहीं ले रही थी। कवि पंकज प्रखर ने अपनी गीत/छन्द एवं कविताओं से कवि सम्मेलन में आए हुए लोगों में देशभक्ति की लहर फूक दीं। शायर सलमान घोसवी ने हम राहे वफा के राही है बस प्यार के गीत सुनायेंगे…..सुनाकर शमा बांधा । हास्य कवि डंडा बनारसी ने सुर्ती चबाकर थूकने से कुछ नहीं होगा……..कुछ काम करके देश को आगे बढ़ाइये, कुत्ते की तरह भौकने से कुछ नहीं होगा………….. सुनाकर श्रोताओं को खूब हसाया। सैदा बैजापुरी ने अपनी रचना ‘‘ न हमसे रात काटी जाती है, न हमसे दिन गुज़ारा जा रहा है, कोई शादी पे शादी कर रहा है… कोई जग से कुवांरा जा रहा है….सुनाकर सभी को हास्य के रंग में सराबोर किया। कवि सम्मेल का संचालन कर रहें गैबी जौनपुरी ने ‘‘वाकिफ हूँ मैं उस शख्स से अंजाना नहीं हूँ….लेकिन मेरा उससे कोई याराना नहीं है….. बेहतर है कि मिल बैठ के पी ले यहीं यारों, इस शहर से आगे कही मयखाना नहीं है….आदि रचनायें सुनाकर तालियां बटोरीं। इसके अतिरिक्त उक्त कवि सम्मेलन में शहाब नोमानी, अचानक मऊवी, तारकेश्वर मिश्र राही, नागेश शाण्डिल्य, शैलेन्द्र मधुर आदि कवियों ने अपनी रचानएं प्रस्तुत की। पालिकाध्यक्ष मु0 तैयब पालकी, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार, सफाई निरीक्षक सत्य प्रकाश, राजस्व निरीक्षक आदर्श त्रिपाठी, सम्मानित सभासदगण, अज़हर कमार फैज़ी, मुनौवर अब्दुल गफूर, विनोद गुप्ता, सुधीर सोनकर, विनय सिंह, फिरोज़ अहमद शब्बु, आमिर, सरवर ज़हीर ओसवाल, राजू सैनी आदि ने आए हुए कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
अन्त में पालिकाध्यक्ष मुहम्मद तैयब पालकी ने अपने अध्यक्षी सम्बोधन से दीपोत्सव कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। पालिकाध्यक्ष ने तीन दिवस तक चले इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये पालिका अधिकारियों/कर्मचारियों, अतिथियों एवं श्रोताओं का अभार व्यक्त किया। उन्होने कहा कि शासन के आदेशानुसार ज़िलाधिकारी महोदय के निर्देशन में उक्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जनपद के सभी सरकारी विभागों के लोगों ने भाग लिया। जिसके लिए हम सभी के आभारी है। उन्होंने श्रोताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि पालिका कम्यूनिटी हाल को आडोटोरियम के रुप में परिवर्तित करने का कार्य प्रगति पर है, कार्य के पूर्ण होने के उपरान्त पालिका महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन कराया जायेगा। ज्ञातव्य हो कि नगर पालिका द्वारा दिनांक 28 अक्टूबर से दिपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें प्रथम दिन स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया तो वहीं द्वितीय दिन लोकगीत संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया। एवं अन्तिम दिन कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। मेलें में लोगों को सरकारी योजनाओं से सम्बन्धित जागरुकता प्रदान की गयी। मेले में छोटे दुकानदारों एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित स्टाल लगाये गये। रहेड़ी समेत विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले छोटे दूकानदारों के लिये मेले में निःशुल्क भाग लेने की व्यवस्था भी की गयी थी। तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम का संचालन राजेश श्रीवास्तव ने किया!


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