अल्लामा इकबाल को बच्चों ने किया याद

मऊ – नौ नवम्बर को प्रख्यात शायर और महान शिक्षाविद् डॉ. अल्लामा इकबाल का जन्मदिन ऊर्दू दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी उपलक्ष्य में आज सर इकबाल पब्लिक स्कूल डोमनपुरा मऊ के प्रांगण में उर्दू को बढ़ावा देने के मकसद से स्कूल के बच्चों और शिक्षकों ने विभिन्न तरह के कार्यक्रम करके अल्लामा इकबाल को याद किया।
प्रिंसिपल अज़ीज़ुन्नेसा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि समाज को और अपने बच्चों को इकबाल की याद दिलाने के मकसद से ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि शायद ही कोई हिंदुस्तानी होगा जो ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा, हम बुलबुके हैं इसके यह गुलसिता हमारा’ से वाकिफ न हो। शायद ही कोई ऐसा होगा जो ‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी’ नज्म चलने पर गुनगुनाता न हो। सच्चाई तो यह है कि अल्लामा इकबाल ने अपनी रचनाओं से आपसी सद्भाव और भाईचारे की जो मिसाल पेश की है, शायद ही उसका कोई बानगी हो।
स्कूल प्रबंधक ओज़ैर गृहस्त ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इकबाल की यह लाइन ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ हमेशा लोगों को सामाजिक एकता, भाईचारा व सौहार्द की प्रेरणा देती रहेंगी।
आज बड़े ही अफसोस की बात है हम उर्दू को देश-दुनिया में अपनी रचनाओं से एक अलग पहचान दिलाने वाले शायर अल्लामा इकबाल को भूलते जा रहे हैं।
इस अवसर पर आज छात्रों ने अल्लामा इकबाल की नज़्मों को पढ़ कर सुनाया और विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर विशेष रूप से स्कूल स्टाफ़ में रोफैदा बानो, अम्मारा फरहत, सुम्बुल परवीन, फौज़िया तबस्सुम, नूरी मज़हर, सीमा आदि ने भी सम्बोधित कर अल्लामा इकबाल की जीवनी पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अन्त में बच्चों से सवाल भी किए गए, जवाब देने वालों को पुरस्कृत कर सम्मानित भी किया गया।


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