शायरी एक पैगाम होती है शायरी कभी मरती नहीं: डॉ इम्तियाज़ नदीम

पांच कलमकारों को उर्दू अकादमी पुरस्कार मिलने पर सजी महफ़िल

मऊ-(रिपोर्ट :सईदुज़्ज़फर) बज़मे उर्दू मऊ के तत्वावधान में आज डॉ इम्तियाज़ नदीम के आवास पर मऊ के कलमकारों को उनकी किताबों पर उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कृत किए जाने पर उनके सम्मान में एक शेर-व-शायरी की महफ़िल सजायी गई, जिसकी अध्यक्षता शायर गुमान अंसारी ने की।
इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ इम्तियाज़ नदीम ने कहा कि शायरी एक पैगाम होती है शायरी कभी मरती नहीं, शायर शायरी में बहुत कुछ दर्शाता है।
डॉ शकील अहमद ने अपनी लिखी गई किताब के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लाकडाउन जहां मुसीबतों का दौर था वहीं कुछ लोगों के लिए वरदान भी साबित हुआ, आगे उन्होंने बताया कि उनकी जिस किताब “सफर की खूशबू” पर पुरस्कार मिला है वह लाकडाउन में ही तैयार हुयी है। उन्होंने नये लिखने वालों व विशेषकर शायरों को सलाह देते हुए कहा कि नये लिखने वाले जो लिखते हैं उसको इकठ्ठा करें और संभाल कर रखें, उसको किताबी शकल देने का प्रयास करें और उर्दू अकादमी और फखरूददीन कमेटी में किताबें जमा कर उसका लाभ उठाएं। इस अवसर पर उन्होंने सभी बधाई व सम्मान देने वालों का शुक्रिया अदा किया।
डॉ ज़हीर हसन ज़हीर ने कहा कि छात्र जीवन से ही सीख रहा हूं सीखने का ही जज़्बा था जो आज मुझे यहां तक ले आया है उन्होंने सभी का शुक्रिया अदा किया।
इस अवसर पर शायरों ने “ज़ायका ज़ख्मों का यूं कैसे समझ में आएगा” पर अपनी शायरी पेश की।
अमीर हमज़ा आज़मी ने अपनी शायरी सुनाते हुए कहा कि – “खून फट जाता है कैसे ये समझ में आएगा, – – जब सगा भाई सगे भाई से धोखा खाएगा”
अचानक मऊवी ने अपनी शायरी पेश करते हुए “महफिले शेरो-सुखन में वही रह पाएगा,– शायरी में जो नया अंदाज़ लेकर आएगा” सुना कर खुब वाहवाही लूटी
उस्ताद शायर गुमान अंसारी ने, “ऐ निगारे शायरी मैं चुप भी हो जाऊं अगर,– मेरी रातों का फसाना वक्त खुद दुहराएगा” सुनाया
डॉ इम्तियाज़ नदीम ने, “हमने जिस के नाम कर दी अपने दिल की कायनात, – – क्या पता वह एक दिन बेखबर हो जाएगा” सुनाया।
इम्तियाज़ साहिल ने “ठीक कर लो अपनी इस गिरती हुई दिवार को– वरना एक दिन तेरा आंगन रास्ता हो जाएगा” सुनाया।
अज़हर सलीम ने “सिदके दिल से अजनबी लोगों को जो आज़माएगा…. सुनाया
जावेद अहमद सामिर ने शायरी सुनाते हुए कहा कि “मैं नहीं समझा सका दिल को जुदाई का सबब, – – भूले भटके आएगा तो अब वही समझाएगा”
इरशाद आबिद ने “मैं हूँ आज़ादी का परचम आ मेरे साए में बैठ… सुनाया
साबिर हबीब ने “सोचता रहता हूं ऐसा ज़माना भी आएगा…. पढ़ा
इसके अतिरिक्त अन्य शायरों ने भी अपनी शायरी से महफ़िल में समां बांधा।
इस अवसर पर डॉ नूरूलहसन, सरफराज़ सिल्को, इंजीनियर सईदुर्रहमान, सईदुज़्ज़फर आदि उपस्थित रहे।


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