कोविड के आरटीपीसीआर टेस्ट की सुविधा अब मऊ के नवनिर्मित तड़ियांव अस्पताल में भी

मऊ- कोविड के आरटीपीसीआर टेस्ट (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) की सुविधा अब जिले में भी हो गई है । इस आधुनिक जाँच की व्यवस्था घोसी स्थित नवनिर्मित अस्पताल तड़ियांव में की गई है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने दी। इस टेस्ट के जरिए व्यक्ति के शरीर में वायरस का पता लगाया जाता है। इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। जांच के दौरान शरीर के कई हिस्सों से सैंपल लेने की जरूरत पड़ती है। ज्यादातर नाक और गले से म्यूकोजा के अंदर वाली परत से स्वैब लिया जाता है।
सीएमओ ने बताया कि आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में सामान्यतः 6 से 8 घंटे का समय लग सकता है। कई बार इससे ज्यादा समय भी लग सकता है। आरटीपीसीआर टेस्ट शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम है। यही वजह है कि कुछ लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण सामने न आने के बावजूद भी यह टेस्ट पॉजिटिव आता है। आगे चलकर वायरस के कोई लक्षण सामने आएंगे या नहीं, या फिर वायरस कितना गंभीर रूप ले सकता है। इसी के लिये मरीज को आइसोलेट कर उसकी निगरानी की जाती है। कुछ समय या दस दिनों (15 दिन पहले था) तक कोई लक्षण या दिक्कत नहीं आने पर मरीज को डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
महामारी विशेषज्ञ रविशंकर ओझा ने बताया कि अपने जिले के आरटीपीसीआर की मशीन से सैंपल टेस्ट में 250 रिपोर्ट निकाली जा रहीं हैं। पहले मेडिकल कालेज अंबेडकर नगर और बीएचयू बनारस भेजी जाती थी। इस टेस्ट के लिए किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर आप कोई विशेष दवा का सेवन कर रहे हैं तो एक बार विशेषज्ञ से परामर्श करके सैंपल दें ताकि रिपोर्ट पर उस दवा का असर न हो। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर व्यक्ति को कुछ दिन के लिए आइसोलेट किया जाता है या अस्पताल में भर्ती भी किया जा सकता है। वहीं निगेटिव रिपोर्ट का मतलब है कि फिलहाल उस समय तक आप के शरीर में वायरस की मौजूदगी नहीं है।


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