इशरत ने संस्कृत से नेट क्वालीफाई कर छात्राओं को दिखायी एक नई राह

(रिपोर्ट:सईदुज़्ज़फर – 8009543112)

मऊ – मऊ की बेटियाँ आज शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं है कोई भी रिजल्ट घोषित होता है तो उसमें मऊ के छात्र अपनी प्रतिभा दिखाते हुए अपना नाम अवश्य दर्ज करवाते हैं मऊ की बेटियों ने तो कमाल ही कर दिया आज जब यूजीसी नेट/जेआरएफ का रिजल्ट घोषित किया गया तो मऊ की एक छात्रा ने संस्कृत विषय से नेट क्वालीफाई कर ये दिखा दिया कि मुस्लिम सिर्फ उर्दू ही नहीं पढ़ सकते बल्कि जिस क्षेत्र में भी जाएंगे वहां सफलता प्राप्त कर लोगों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
अब तक तो मऊ के छात्र उर्दू और अन्य विषयों में नेट/जेआरएफ क्वालीफाई करते थे लेकिन मऊ की एक होनहार छात्रा मुहल्ला मलिक टोला निवासी ज़फर अहमद ज़मीरी की बेटी व कारी ज़मीर अहमद की पोती इशरत जहां ने संस्कृत विषय से नेट क्वालीफाई कर मुस्लिम छात्राओं के लिए मार्गदर्शी बनीं कि लड़कियां ठान लें तो कुछ भी कर सकती हैं
ज्ञात हो कि इशरत जहां ने अभी पिछले साल ही वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से सम्बध्द गोपीनाथ पीजी कालेज की एमए संस्कृत विषय से कालेज टापर छात्रा भी थीं।
इशरत जहां ने दारूलओलूम निस्वां से इंटर व तालीमुद्दीन निस्वां डिग्री कालेज से ग्रेजुएशन किया। इस समय ये तालीमुद्दीन निस्वां डिग्री कालेज में संस्कृत प्राध्यापिका के रूप में कार्यरत भी हैं।
इन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, दादा व अपने टीचर्स दिलशाद मैम, सईदुज़्ज़फर सर, चन्द्रमणि सर, डॉ सुधा त्रिपाठी मैम, डॉ योगेन्द्र सर, अनवारूलहक नेशनल, छाया मैम आदि को देते हुए कहा कि ये इन लोगों की दुआओं और मार्गदर्शन से ही ये सफलता प्राप्त हुयी है।
आगे इशरत जहां ने बताया कि तालीमुद्दीन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला और आगे बढ़ने का रास्ता मिला, मेरे पिता ने हर कदम पर मुझे हौसला दिया, मेरी कामयाबी में मेरे पिता का ही बहुत बड़ा रोल रहा है, साथ ही साथ दिलशाद मैम ने भी हर मोड़ पर हमें गाईड किया, मैं इन सब का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।


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