मऊ- भाकपा माले ने देश में बढ़ती महंगाई, मोदी सरकार द्वारा बार-बार पेट्रोल डीजल रसोई गैस की मूल्य में वृद्धि के खिलाफ व रामनवमी के बहाने पूरे देश भर में लंपट हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा जगह-जगह किए गए दंगों, जेएनयू में शाकाहार बनाम मांसाहार भोजन के नाम पर भगवा संगठनों द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ तथा बलिया में गिरफ्तार पत्रकारों की बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर किया गया प्रदर्शन राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
भाकपा (माले) के जिला सचिव बसंत कुमार ने कहा कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही मोदी सरकार अब तक 12 बार पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी है यह जनता से धोखाघड़ी है मतलब हर बार चुनाव से पहले के महीनों में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर रखो और जैसे ही चुनाव हो जाए तो फटाफट वृद्धि कर दो। पेट्रोल औसतन रुपए 107/ प्रति लीटर या इससे अधिक पर मिल रहा है, डीजल भी रुपए 99/ पार कर चुका है रसोई गैस का सिलेंडर अब रुपए 1030/ तक पहुंच गया है।
उन्होने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जो खुदरा बाजार में महंगाई का पैमाना होता है फरवरी में 6.07प्रतिशत पर जा चुका था। रामनवमी में रथयात्रा और जुलूस के बहाने हिंदुत्ववादी संगठनों के लंपट दबंगों ने पूरे भारत में उत्पात मचा दिया है समाज के आपसी सौहार्द को बिगाड़ते हुए नफरत का जहर घोल दिया है जो लोकतंत्र संविधान और कानून के राज के हित में नहीं है, इनके खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार भी इनके निशाने का शिकार बन रहे हैं,जेएनयू के बहाने देश में खाने-पीने और अपनी धार्मिक परंपरा को निभाने की मिली संवैधानिक अधिकारों पर हमले किए जा रहे हैं।
उन्होनें कहा कि मिर्जापुर में विहिप द्वारा आयोजित शोभायात्रा ने तमाम मस्जिदों के सामने रुक कर हुड़दंग व उकसाने वाली नारेबाजी की। इसके पहले, आठ अप्रैल को एक मोटरसाइकिल जलूस ठीक रोजा-अफ्तार के समय निकाला गया, जो पहली बार निकला था। इसके साथ भारी पुलिस बंदोबस्त भी था। वह हर मस्जिद के सामने रुक कर “अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है” का नारा लगा रहा था। उधर प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी विहिप द्वारा निकाले गए रामनवमी के जुलूस में ‘राममंदिर झांकी है, ज्ञानवापी बाकी है’ के नारे लगाए गए।
उन्होनें कहा कि विहिप समेत भगवा संगठनों की साम्प्रदायिकता फैलाने की इस तरह की कार्रवाइयों को भाजपा, संघ और मोदी-शाह-योगी की सत्ता का मौन समर्थन प्राप्त है। प्रशासन इस पर कड़ाई से रोक लगाने की जगह इसे संरक्षण दे रहा है। ऐसे में जनता को सतर्कता बरतते हुए नफरत व साम्प्रदायिक जहर फैलाने की इनकी कोशिशों को कामयाब नहीं होने देना होगा, जैसा कि मिर्जापुर की मस्जिद वाली घटना में हिन्दू-मुस्लिम निवासियों द्वारा मिलकर भगवा साजिश को नाकामयाब कर दिया गया।
जेएनयू की उपरोक्त घटनाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और साम्प्रदायिक सद्भाव व अमन-चैन को नुकसान पहुंचाने वाली हर कार्रवाई पर कड़ाई से रोक लगाने की मांग की गई।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से शिव मूरत गुप्ता विद्याधर गिरिजा तेज बहादुर रामबली अजमल बिलाली विजय दुर्ग विजय रामाशंकर फेकू राजभर दीपक गोविंदा जंग बहादुर फेकू आदि शामिल रहे।

जेएनयू के बहाने देश में खाने पीने का कोड थोप रही है मोदी सरकार: माले
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