मऊ – जिलाधिकारी अरुण कुमार की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष की जनपद स्तरीय समिति की बैठक कैंप कार्यालय पर संपन्न हुई।
बैठक के दौरान रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष में 7 मामलों में स्वीकृति एवं 31 मामलों को निरस्त किया गया। मेडिकल स्तर पर 58 केस लंबित है जिसको जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारी को निस्तारण करने के निर्देश दिए।
कन्या सुमंगला योजना में उप जिलाधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी के पोर्टल पर कुल 565 मामले लंबित है, जिसके निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को क्रमशः उप जिलाअधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी के माध्यम से पोर्टल पर लंबित मामले को जल्द से जल्द निस्तारण कराने के जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिए गए।
जिला बाल संरक्षण योजना में जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि जनपद स्तर विकासखंड एवं ग्राम स्तर पर नियमित रूप से नियमानुसार बैठक कराई जाए।
वन स्टॉप सेंटर योजना में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जो भी मामले पाए जाते हैं उसे नियमानुसार परिवारो को पुनर्वास कराएं या उचित संरक्षण संस्थाओं में विशेष संरक्षण प्रदान करें तथा शासन स्तर से मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध कराएं। लंबित मामलों को 1 सप्ताह के अंदर निस्तारण कराएं। जिलाधिकारी ने परिवहन अधिकारी को निर्देश दिये कि हेल्पलाइन नंबर 112, 181, 1090, 1098, 1076 को जनपद के सभी स्कूली वाहनों पर लिखवाना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए कि स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों से संबंधित स्वागत केंद्र,शिशु पालना केंद्र की स्थापना जल्द से जल्द कराएं एवं उसे क्रियाशील रखें। जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन शक्ति, वन स्टॉप सेंटर, एन0जी0ओ0 एवं अन्य समाजसेवी के माध्यम से प्रचार प्रचार किया जाए जिससे जनपद के बाल लिंगानुपात में सुधार हो सके।
बाल कल्याण समिति में अब तक 80 प्रकरण आए जिसमें 18 लड़के एवं 62 लडकिया है जिनको घर पर पुनर्वासी किया गया।
राजकीय संप्रेक्षण गृह योजना में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बच्चों की देखभाल हेतु अपर पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी अपने स्तर से जनपद में संचालित बाल संप्रेक्षण गृह का नियमानुसार निरीक्षण करते हुए बच्चों के बीच संवाद स्थापित करें तथा महिला कल्याण विभाग के संरक्षण अधिकारी भी अपने विभागीय नियमानुसार प्रतिदिन बच्चों के साथ संवाद स्थापित करते रहें। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे 0 से 18 वर्ष तक जिसमें भीख मांगने वाले बच्चे, बाल श्रमिक, घुमंतू बच्चे, दैवी आपदा से प्रभावित बच्चे, कारागार में निरुद्ध माता-पिता के बच्चे, लावारिस बच्चे, कूड़ा बीनने वाले बच्चे, सड़क पर आने वाले व काम करने वाले बच्चे, असाध्य रोग से पीड़ित बच्चे, भूले भटके आदि बच्चों के मिलने पर उनको सुरक्षा प्रदान करते हुए पुनर्वासन की व्यवस्था करें।
उक्त अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा, अपर जिलाधिकारी भानु प्रताप सिंह, जिला प्रोवेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज, रुद्र प्रताप सिंह, नरेंद्र राय, कंचन तिवारी, रमाशंकर यादव, अनीता सिंह, संध्या सिंह, शिवानंद सिंह, अर्चना राय, रेनू पांडे सहित प्रवेश ने बाल संरक्षण तथा एनजीओ के कर्मचारी उपस्थित रहे।
